आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में आज यानी 24 अक्टूबर की सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ। हैदराबाद-बेंगलुरु हाईवे पर चल रही एक प्राइवेट लग्जरी वोल्वो बस में अचानक आग लग गई। हादसे में 12 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि करीब 20 लोग घायल हो गए। बस में कुल 40 यात्री सवार थे।
जानकारी के अनुसार, हादसे के समय ज्यादातर यात्री गहरी नींद में थे, जिसके कारण वे समय रहते बाहर नहीं निकल पाए और कई लोगों की जान चली गई। यह हादसा एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि ऐसे हादसे बार-बार क्यों हो रहे हैं, खासतौर पर जैसलमेर से बेंगलुरु जैसे लंबे रूटों पर चलने वाली बसों में। क्या वजह है कि इन मार्गों पर लग्जरी बसों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं? साथ ही, अब यह समझना बेहद जरूरी है कि बस यात्रा के दौरान खतरे को कैसे पहचाना जाए और किन सावधानियों से हम अपनी और दूसरों की जान बचा सकते हैं।
बेंगलुरु की तरह राजस्थान में भी हुई थी घटना
हैदराबाद-बेंगलुरु हाईवे पर चल रही एक बस में अचानक आग लगने की घटना ने भयावह रूप ले लिया। आग का पता चलते ही करीब 20 यात्री किसी तरह खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि बाकी यात्री अंदर ही फंस गए और भीषण लपटों में जिंदा जल गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे तथा मृतकों की पहचान और लापता यात्रियों की तलाश शुरू कर दी गई।
गौरतलब है कि इससे पहले 14 अक्टूबर को भी जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक बस में आग लगने से 22 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस हादसे में भी ज्यादातर यात्रियों की मौत बस के अंदर ही हो गई थी। लगातार घट रही इन घटनाओं ने देशभर में बस यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और लोगों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
क्या है बस में आग लगने के मुख्य कारण?
विशेषज्ञों के अनुसार, बसों में आग लगने के पीछे कई तकनीकी और बाहरी कारण होते हैं। अक्सर एसी बसों में शॉर्ट सर्किट या सेंट्रल एसी सिस्टम की खराबी आग लगने का प्रमुख कारण बन जाती है। हैदराबाद-बेंगलुरु मार्ग पर हुए हालिया हादसे में भी बाइक की टक्कर के बाद बस में आग भड़क उठी थी। इसके अलावा, अत्यधिक गर्मी और यात्रियों की भीड़ के कारण बस के भीतर तापमान बढ़ने से भी आग लगने का खतरा रहता है। कई बार बसों में आग लगने की स्थिति में फायर एग्जिट या बचाव के पर्याप्त इंतज़ाम न होने से लोगों की जान नहीं बच पाती।
कैसे पहचानें खतरा?
अगर आप बस में यात्रा कर रहे हों और अचानक बस के अंदर धुआं या जलने की गंध महसूस हो, तो तुरंत गाड़ी को रोकें या रुकवाएं और सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लें। बस मालिकों को भी अपनी गाड़ियों का नियमित निरीक्षण कराना चाहिए, ताकि शॉर्ट सर्किट, तेल या गैस रिसाव जैसी समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सके। वहीं, यदि किसी कारणवश बस में दुर्घटना की आशंका हो, तो ड्राइवर को तुरंत सभी यात्रियों को बाहर निकालकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।





