Friday, March 20, 2026

Fact Check: “भारतीय सेना आरएसएस और हिंदुओं की सेना” क्या सच में अमित शाह ने दिया ऐसा बयान? क्या है वायरल हो रहे विडियो का सच

Fact Check: बिहार में विधानसभा चुनावों को लेकर प्रचार अभियान पूरे जोरों पर है। इसी बीच सोशल मीडिया पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस वीडियो में वे भारतीय सेना को “हिंदुत्व और आरएसएस की सेना” बता रहे हैं। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? आइए, जानते हैं इस वायरल वीडियो की सच्चाई।

क्या है वायरल Fact Check?

29 अक्टूबर को एक फेसबुक यूजर ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें कथित रूप से अमित शाह कहते दिख रहे हैं: “मैं आजकल सोशल मीडिया पर कांग्रेस और AAP के लोगों की बकवास सुन रहा हूं, जो कहते हैं कि भारतीय सेना का भगवाकरण किया जा रहा है। मैं ये साफ कहता हूं कि भारतीय सेना हिंदुत्व की सेना है, आरएसएस की सेना है। ये किसी मुसलमान, दलित या क्रिश्चियन की सेना नहीं है। जिसे दिक्कत है, वो पाकिस्तान चला जाए।”

वीडियो शेयर करने वाले यूजर ने दावा किया कि गृह मंत्री ने “लेफ्टिनेंट जनरल विनय घई” के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए यह टिप्पणी की और भारतीय सेना के भगवाकरण का समर्थन किया।

Fact Check में क्या मिला?

भारत एक्सप्रेस की फैक्ट-चेक टीम ने इस वायरल वीडियो की जांच की। सबसे पहले संबंधित कीवर्ड्स से खोज की गई, लेकिन किसी विश्वसनीय स्रोत — जैसे समाचार एजेंसी या मंत्रालय ने इस तरह के बयान की पुष्टि नहीं की थी।

इसके बाद वीडियो के विजुअल्स का रिवर्स इमेज सर्च किया गया। जांच में पता चला कि वीडियो के दृश्य 25 अक्टूबर 2025 को बिहार के मुंगेर में अमित शाह की जनसभा के हैं, जिसका लाइव प्रसारण उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर किया गया था। ओरिजिनल वीडियो देखने पर यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने भारतीय सेना या उसके धर्म से संबंधित कोई टिप्पणी नहीं की थी। तकनीकी विश्लेषण में भी कई गड़बड़ियाँ सामने आईं — जैसे कि लिप-सिंक का असंगत होना और चेहरे के किनारों पर धुंधलापन। विशेषज्ञों ने जब इसे डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट (DAU) और Hive AI जैसे टूल्स से जांचा, तो पुष्टि हुई कि वीडियो को AI तकनीक के ज़रिए छेड़ा गया है

निष्कर्ष

जांच के बाद यह साफ हो गया कि वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी (Deepfake) है। अमित शाह ने भारतीय सेना को किसी धर्म या संगठन की सेना बताने जैसा कोई बयान नहीं दिया था। बिहार चुनाव के मद्देनज़र सोशल मीडिया पर इस तरह के भ्रामक और छेड़छाड़ किए गए वीडियो की संख्या बढ़ रही है। इसलिए किसी भी वीडियो को शेयर करने या उस पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें

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