चरथावल (मुजफ्फरनगर): देशभर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, परंतु मुजफ्फरनगर जनपद के ग्राम सिकंदरपुर में यह मिशन केवल कागजों तक ही सीमित दिख रहा है। गांव में स्वच्छता की स्थिति इतनी बदतर है कि कूड़ा निस्तारण केंद्र महीनों से निष्क्रिय पड़ा है और सड़कें कचरे के ढेर से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सफाई कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है!

सिकंदरपुर में नदारद पड़ा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए Bekhabar.IN की टीम जब सिकंदरपुर पहुंची तो पाया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत वर्ष 2024-25 में लाखों रुपये की लागत से निर्मित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र पूरी तरह बदहाल स्थिति में है। कूड़ा केंद्र में महीनों से जमा कचरे का निस्तारण नहीं हुआ है, जिससे वहां भारी दुर्गंध फैली हुई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कूड़ा घर भर जाने के कारण लंबे समय से यह केंद्र उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। इसकी वजह से आसपास रहने वाले ग्रामीणों और समीप स्थित साक्षी बाल विद्या मंदिर के बच्चों को भयंकर बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है!

मुख्य मार्ग पर खुले में डाला जा रहा कचरा
ग्रामीणों का कहना है कि सफाई कर्मी रोजाना गली-गली जाकर घरों से कचरा एकत्रित तो करता है, लेकिन कूड़ा केंद्र पहले से भरा होने के कारण वह सारा कचरा गांव के मुख्य मार्ग (अकबरगढ़ से सिकंदरपुर) के किनारे खुले में फेंक देता है। इस खुले कचरे से जहां राहगीरों को परेशानी होती है, वहीं बीमारी फैलने का भी खतरा बढ़ गया है। गांव के लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस समस्या को लेकर ग्राम प्रधान मो. रज़ा से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और सफाई कर्मी दोनों ही इस समस्या को लेकर पूरी तरह उदासीन हैं। उन्होंने कहा कि “प्रधान मो. रजा केवल कागजों पर स्वच्छता दिखा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
सफाईकर्मी रामदास निजी कामों में व्यस्त
गाँव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती दिखाई दे रही है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार सफाईकर्मी रामदास अपनी मनमर्जी से कार्य करता है, जिसके चलते सफाई व्यवस्था अव्यवस्थित हो गई है! ग्रामीणों का कहना है कि नालियों की सफाई नियमित रूप से न किए जाने के कारण उनमें गंदा पानी भरा रहता है। कई जगहों पर नालियाँ पूरी तरह जाम हो चुकी हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। बरसात या हल्की बूंदाबांदी के दौरान यह स्थिति और भयावह हो जाती है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि सफाईकर्मी रामदास मनमानी करता है और गाँव के अधिकांश हिस्सों में सफाई कार्य नहीं किया जाता! जब कभी सफाई की जाती भी है, तो वह औपचारिकता मात्र होती है!

ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश, प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
गांव में फैली गंदगी और दुर्गंध को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और जिम्मेदार सफाईकर्मी मनमानी पर उतर आए हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव की सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएँ तथा लापरवाह सफाईकर्मी और ग्राम प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने Bekhabar.IN के माध्यम से जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि गांव में स्वच्छता व्यवस्था बहाल हो सके और लोगों को राहत मिल सके।





