UP Voter List 2003: देश में वोटर आईडी कार्ड बनवाने और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग लगातार नई व्यवस्थाएं लागू कर रहा है। इसी बीच लोगों के मन में एक सवाल अक्सर उठता है-क्या सिर्फ आधार कार्ड से वोटर आईडी बन जाएगा? तो इसका जवाब है-हाँ, आधार कार्ड पहचान प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह अकेला दस्तावेज़ पर्याप्त नहीं है। कुछ अन्य प्रमाण भी स्थिति के अनुसार मांगे जा सकते हैं।
वोटर ID के लिए क्या जरूरी है? भारत का नागरिक होना और न्यूनतम 18 वर्ष की आयु पूरी करना वोटर आईडी आवेदन की पहली शर्त है। पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड जैसे दस्तावेज़ दिए जा सकते हैं। वहीं, पते के प्रमाण के लिए बिजली बिल, पानी बिल, बैंक पासबुक आदि स्वीकार किए जाते हैं।
UP Voter List 2003
क्या बदलने वाला है? जब नई मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशन होगा, तब जिन लोगों का नाम 2003 की सूची में नहीं था, उन्हें नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस का जवाब देते समय पहचान या पते के प्रमाण के रूप में 13 दस्तावेजों की सूची में से कोई एक दस्तावेज़ देना अनिवार्य होगा। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। BLO को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी पात्र व्यक्ति का नाम गलती से भी न कटे।
ये 13 दस्तावेज़ होंगे मान्य
नोटिस का जवाब देते समय इनमें से किसी एक दस्तावेज़ की कॉपी देना अनिवार्य है: आधार कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, बैंक या डाकघर पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड, किसान पासबुक/किसान क्रेडिट कार्ड, सरकारी पेंशन बुक या पेंशन आईडी, छात्र पहचान पत्र (मान्यता प्राप्त संस्थान) बीमा पॉलिसी, सरकारी विभाग/यूनियन का आईडी कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र/आयु प्रमाणपत्र इनमें से एक भी दस्तावेज़ देने पर आपका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित माना जाएगा। आधार कार्ड वोटर आईडी बनवाने और मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, लेकिन साथ ही अन्य पहचान और पते के दस्तावेज़ भी मान्य हैं। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि पात्र मतदाता का नाम किसी भी स्थिति में सूची से न कटे और हर नागरिक अपने मताधिकार का उपयोग कर सके।





