Tuesday, March 24, 2026

गुजरात के गांव में हाईटेक गौशाला, गायों से बना करोड़ों का मॉडल…

हाईटेक गौशाला: प्राचीन काल से ही भारत में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और आज भी अगर कोई गायों को मां के समान अपनाता है, तो गाय बदले में सेहत और रोज़गार दोनों लौटा सकती है। गुजरात राज्य के सूरत ज़िले के नवीपार्डी गाँव में नीलेश अहीर और उनका परिवार यह साबित कर रहा है कि गौ पालन भी एक सफल और आधुनिक बिज़नेस मॉडल बन सकता है।

भारत में गाय को पशु नहीं बल्कि माता कहा गया है और उसकी वजह है कि सदियों से गाय ने जिस घर में कदम रखा, वहाँ न सिर्फ दूध दिया बल्कि जीविका दी, पोषण दिया, और जीवन चलाने की ताक़त दी। पर क्या आज के समय में भी यह संभव है? क्या एक परिवार गायों से समृद्ध हो सकता है? इसका जवाब आपको गुजरात के सूरत ज़िले के छोटे से गाँव नवी पारडी में मिल जाएगा।

यहाँ है एक ऐसी गौशाला जो पारंपरिक पशुपालन को और आधुनिक टेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़कर गायों का पालन कर रही है। यह गौशाला सिर्फ गायों का घर ही नहीं — बल्कि प्रकृति और प्रगति के तालमेल का एक नया मॉडल है। दूर तक नजर जाने पर दिखाई देता है, गिर नस्ल की गायों का बड़ा झुंड, हवा से बातें करता हुआ, जैसे किसी पिकनिक से लौटकर आया हो। साथ में आती है खुशियों भरी घंटियों की मधुर आवाज़, और सामने खड़े मिलते हैं, नीलेश भाई अहीर, “गीर ऑर्गेनिक फार्म” के युवा चेहरे, जो इस बात पर विश्वास करते हैं कि भविष्य वही है, जिसमें गाय और धरती दोनों का सररक्षण हो।

नीलेश बताते हैं, “उनके पापा का विज़न था कि वे लोगों को अच्छा दूध दें। अच्छा फल, सब्ज़ी, अनाज दें। और वो तभी होगा जब ज़्यादा संख्या में गाय पालेंगे, और गायों के गोबर की खाद से खेत आबाद करेंगे। हमने इसे बिज़नेस मॉडल बनाया… वर्तमान में उनकी गौशाला में 450 से ज़्यादा देसी गौवंश हैं और हर गाय सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि जैविक खेती का आधार भी तैयार करती है।

देश में 20वीं पशुगणना के अनुसार सबसे ज्यादा संख्या गिर नस्ल की गायों (6857784) की है, लाखिमी (6829484) दूसरे नंबर पर, साहीवाल (5949674)तीसरे नंबर पर, बचौर (4345940) चौथे नंबर पर, हरियाणा (2757186) पांचवे नंबर पर, कंकरेज (2215537)छठे पर, कोसली (1556674) सातवें पर, खिलारी (1299196) आंठवें पर, राठी (1169828) नौवें नंबर पर और मालवी (1032968 ) दसवें नंबर परहै।

नीलेश आगे समझाते हैं, “5–10 गाय पालना और 500 गाय पालना एक जैसा नहीं है। जैसे-जैसे बढ़ोगे, टेक्नोलॉजी को अपनाना पड़ेगा। गायों को खुला छोड़ना, वो अपने आप खाना खाएँ, पानी पीएँ और दूध देने खुद चलकर आएँ, इसके लिए स्मार्ट सिस्टम चाहिए।”

नीलेश के भाई नितिन अहीर बताते हैं, “आमतौर पर लोग समझते हैं कि पशुपालन में पैसा नहीं है, इसलिए लोग इस काम को छोड़ रहे हैं। लेकिन सच उल्टा है। गाय दूध के साथ-साथ गाय गोबर और गौमूत्र भी देती है, जिससे खाद तैयार होती है। इससे कमाई और रोज़गार दोनों बढ़ते हैं।”

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