Sunday, March 22, 2026

Artificial Rain In Delhi: दिल्ली में हो रही नकली बरिस, जानिए क्या है सच्चाई?

Artificial Rain In Delhi: दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है इसी को देखते हुए सरकार कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी में जुटी है। क्लाउड सीडिंग तकनीक का इस्तेमाल करके हवा को साफ करने का प्रयास किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से बादलों में केमिकल छोड़कर बारिश कराई जाती है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो 29 अक्टूबर को दिल्ली में पहली कृत्रिम बारिश कराई जा सकती है।

Artificial Rain In Delhi: देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों धुआं-धुआं सी नजर आ रही है। दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर के कई क्षेत्रों में एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया था। हालात ये बन गए हैं कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दिल्ली के लोगों से इन दिनों मॉर्निंग वॉक न करने की सलाह दी है। ऐसे में अब दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को कम करने के लिए जल्द से जल्द कृत्रिम बारिश कराने का प्लान बना रही है। लेकिन इस पर भी सवाल उठ रहे हैं क्या क्लाउड सीडिंग से हवा साफ होगी?

दिल्ली में शुक्रवार को वायु गुणवत्ता में मामूली सा सुधार हुआ और यह ‘बेहद खराब’ से 290 AQI ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के समीर ऐप के अनुसार, आनंद विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक 403 दर्ज किया गया जो गंभीर श्रेणी में आता है। यह सभी निगरानी केंद्रों में सबसे अधिक है। वहीं अब वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार कृत्रिम बारिश कराने जा रही है।

क्या है क्लाउड सीडिंग?

क्लाउड सीडिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत बादलों में कुछ खास तरह के केमिकल छोड़े जाते हैं ताकि वे पानी की बूंदों में परिवर्तित हो सकें और बारिश हो सके। इस प्रक्रिया को तभी शुरू किया जाता है जब आसमान में बादल तो हों, लेकिन उनमें बारिश कराने लायक नमी न हो। इस तकनीक से सूखे इलाकों में या जहाँ पानी की कमी हो, वहाँ मदद मिल सकती है।

यह ट्रायल दिल्ली में पानी की कमी को दूर करने और प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कृत्रिम बारिश से न सिर्फ पानी की आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है, बल्कि हवा में घुले प्रदूषण कणों को भी बरिस के साथ नीचे लाया जा सकता है। हालांकि, इस तकनीक की सफलता बादलों की स्थिति और हवा में मौजूद नमी पर निर्भर करती है। वैज्ञानिकों का यह मानना है कि अगर क्लाउड सीडिंग की यह तकनीक सफल होती है, तो भविष्य में इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर भी किया जा सकता है।

Artificial Rain In Delhi: दिल्ली में कृत्रिम बारिश से कम होगा प्रदूषण?

आमतौर पर प्रदूषण को कम करने के लिए बारिश वरदान साबित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हल्की से मध्यम बारिश हवा की गुणवत्ता को कुछ समय के लिए सुधार ला सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कृत्रिम बारिश से दिल्ली की AQI 50 से 80 प्वाइंट तक कम हो सकता है, हालांकि यह बारिश की तीव्रता पर भी निर्भर करता है। यह हवा में घुसे भारी कणों PM 2.5 और PM10, जो कि सर्दियों के मौसम में अधिक होते हैं उन्हें नीचे बैठा सकता है।

हालांकि, यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकती। गाड़ियों, निर्माण स्थलों, पराली जलाने और उद्योगों से होने वाला प्रदूषण जारी रहने पर कुछ दिनों में AQI फिर से बढ़ जाता है। इसके लिए बड़े स्तर पर समाधान की जरूरत है।

भारत में पहले भी कई स्थानों पर हो चुकी है क्लाउड सीडिंग?

दिल्ली में क्लाउड सीडिंग तकनीक का उपयोग पहली बार हो रहा है लेकिन यह भारत में पहली बार नहीं है। इससे पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य सूखे के समय खेती के लिए कृत्रिम बारिश कराने की कोशिश कर चुके हैं। पहली बार 1972 में मौसम विभाग द्वारा इसका प्रयोग किया गया था। हाल ही में, कर्नाटक और महाराष्ट्र ने सूखाग्रस्त जिलों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया।

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