Friday, March 20, 2026

Bihar Elections 2025: बिहार की सियासत में बढ़ती महिलाओं की हिस्सेदारी, लेकिन बराबरी का सफर अब भी अधूरा! एक क्लिक पर जानिए ये असमंजस चुनावी कहानी!

Bihar Elections 2025: कभी चुनावी रैलियों में सिर्फ तालियां बजाने वाली महिलाएं अब खुद मंच संभालने लगी हैं। बिहार की गलियों में अब चुनावी नारे सिर्फ मर्दों की आवाज़ में नहीं गूंजते, बल्कि हर चौक-चौराहे पर वोट मांगती महिलाओं की गूंज सुनाई देती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है — क्या इस बदलती तस्वीर के बावजूद महिलाओं को सियासत में वाकई बराबरी का हक मिला है? 2010 से 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं मतदान में तो पुरुषों से आगे हैं, पर जब टिकट बंटवारे की बारी आती है, तो राजनीतिक दल अब भी उन्हें हाशिए पर ही रख देते हैं।


Bihar Elections 2025: मतदान में आगे, प्रतिनिधित्व में पीछे

बिहार का चुनावी इतिहास गवाह है कि यहां महिलाएं मतदान के मामले में हमेशा पुरुषों से आगे रही हैं। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में महिला वोट प्रतिशत हर बार पुरुषों से अधिक रहा। यह दर्शाता है कि लोकतंत्र में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है। लेकिन जब बात आती है चुनावी टिकट और सत्ता में हिस्सेदारी की, तब तस्वीर उतनी उजली नहीं दिखती।


2010: उम्मीद की शुरुआत

साल 2010 में 214 महिला उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में कदम रखा। कांग्रेस ने सबसे अधिक 32 महिलाओं को टिकट दिया, लेकिन उनमें से कोई भी जीत नहीं सकी। जेडीयू ने 23, बीजेपी ने 12 और आरजेडी ने 11 महिला प्रत्याशी उतारीं। इनमें से जेडीयू की 21, बीजेपी की 10 और एक निर्दलीय उम्मीदवार विधानसभा तक पहुंचीं। यह शुरुआत भले छोटी थी, लेकिन उम्मीदों से भरी थी।


2015: बढ़ती भागीदारी

2015 में महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 272 हो गई। जेडीयू, आरजेडी और बीजेपी — तीनों दलों ने महिलाओं पर भरोसा जताया। इस चुनाव में 28 महिलाएं विजयी रहीं — जिनमें आरजेडी की 10, जेडीयू की 9, बीजेपी की 4, कांग्रेस की 4 और एक निर्दलीय उम्मीदवार शामिल थीं। यह वह दौर था जब बिहार की राजनीति में महिलाओं की उपस्थिति महसूस की जाने लगी।


2020: बढ़ी संख्या, घटी सफलता

2020 में 370 महिलाओं ने मैदान में उतरकर रिकॉर्ड बनाया। मगर जीत का आंकड़ा घटकर सिर्फ 26 पर ठहर गया। बीजेपी ने 13 महिलाओं को टिकट दिया, जिनमें से 9 जीतीं — यानी 69% की सफलता दर, जो सबसे अधिक थी। आरजेडी की 23 में से 10 और जेडीयू की 27% महिला उम्मीदवार विजयी हुईं। हालांकि कांग्रेस और सीपीआई (एमएल) जैसे दलों ने पिछले चुनाव की तुलना में कम महिलाओं को टिकट दिया।


2025: आकांक्षाएं बड़ी, हिस्सेदारी छोटी

मौजूदा 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 34 और महागठबंधन ने 30 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। सबसे ज्यादा महिलाएं आरजेडी (23), जन सुराज (25) और बसपा (26) ने उतारी हैं। लेकिन जेडीयू और बीजेपी — दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने महिला टिकटों में कटौती की है। दोनों ने इस बार केवल 13-13 उम्मीदवारों को मौका दिया है।
स्पष्ट है कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के वादे तो खूब किए गए, पर अमल की रफ्तार अब भी धीमी है।


आंकड़ों की जुबानी सच्चाई

पिछले 15 सालों में महिला उम्मीदवारों की संख्या 214 से बढ़कर 370 तक पहुंची, लेकिन औसत सफलता दर अब भी लगभग 7% पर अटकी है।
यानी भागीदारी बढ़ी है, मगर जीत की राह कठिन बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में महिला मतदाताओं की सक्रियता को देखते हुए दलों को टिकट वितरण की सोच में बदलाव लाना होगा। क्योंकि आंकड़े साफ बताते हैं — वोट बैंक में महिलाएं आगे हैं, पर सत्ता के गलियारों में अब भी पीछे।

चचा! इसे भी पढ़ लो...

इन वाली खबरों ने रुक्का तार रखा...

Verified by MonsterInsights