Monday, March 23, 2026

प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना कितना खतरनाक? भारतीय वैज्ञानिकों की स्टडी ने खोली चौंकाने वाली सच्चाई

सिंगल-यूज़ प्लास्टिक की बोतल में रोज़ाना पानी भरकर पीना हमारी सेहत को कितना नुकसान पहुँचा रहा है, इसका बड़ा खुलासा भारतीय वैज्ञानिकों ने किया है। मोहाली स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी और लखनऊ के CBMR (सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च) के नए अध्ययन में पहली बार साबित हुआ है कि इन बोतलों से निकलने वाले नैनोप्लास्टिक इंसानी शरीर के सबसे महत्वपूर्ण तीन सिस्टम—गट हेल्थ, खून और सेल्स—को अंदर से धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा रहे हैं।यह नुकसान इतना धीमा और अदृश्य होता है कि व्यक्ति को पता भी नहीं चल पाता, लेकिन इसके असर लंबे समय में बेहद गंभीर हो सकते हैं।

PET बोतलों से निकलने वाला नैनोप्लास्टिक कितना खतरनाक?

वैज्ञानिकों ने PET बोतलों से वास्तविक परिस्थितियों में बनने वाले नैनोप्लास्टिक को तैयार किया। इनका आकार 50 नैनोमीटर से 850 नैनोमीटर के बीच था, यानी इतना छोटा कि ये शरीर के किसी भी हिस्से में आसानी से पहुँच सकते हैं। इन नैनो कणों को तीन महत्वपूर्ण जैविक सिस्टम पर टेस्ट किया गया—

  1. गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome)
  2. रेड ब्लड सेल्स (RBCs)
  3. ह्यूमन एपिथीलियल सेल्स (A549 Cells)

तीनों में भारी नुकसान देखा गया।

गट स्वास्थ्य पर सबसे बड़ा खतरा

शोध में पाया गया कि नैनोप्लास्टिक गट में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया को सीधे नुकसान पहुँचाते हैं।

असर:

  • बैक्टीरिया की ग्रोथ रुक गई
  • सेल मेम्ब्रेन डैमेज
  • एंटीऑक्सीडेंट क्षमता में भारी कमी
  • ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में बढ़ोतरी
  • लंबे समय में गट हेल्थ पूरी तरह गड़बड़ा सकती है

gut microbiome की गड़बड़ी पाचन, इम्यूनिटी, मानसिक स्वास्थ्य और कई बीमारियों की जड़ होती है।

खून भी नहीं बचा—RBCs तक हुई खराब

नैनोप्लास्टिक सीधे Red Blood Cells (RBCs) तक पहुँच गए और—

  • उनकी आकृति को विकृत कर दिया
  • झिल्ली कमजोर कर दी
  • जल्दी टूटने का जोखिम बढ़ गया

इसका मतलब है कि शरीर का खून भी इस प्लास्टिक प्रदूषण से सुरक्षित नहीं है।

DNA तक को खतरा—एपिथीलियल सेल्स को भी नुकसान

Human epithelial cells पर टेस्ट में पाया गया कि शुरुआत में असर कम दिखा, लेकिन लंबे समय के बाद—

  • सेल्स की जीवित रहने की क्षमता कम हुई
  • DNA को नुकसान पहुँचने लगा
  • सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ गया
  • सेल्स समय से पहले मरने लगीं

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि DNA स्तर पर यह नुकसान आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकता है।

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