मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना स्थित डीएवी डिग्री पीजी कॉलेज में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बीए द्वितीय वर्ष के छात्र उज्जवल राणा ने कॉलेज परिसर में ही खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसे उज्जवल को साथी छात्रों ने किसी तरह बचाया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज गेट पर जुट गए और कॉलेज प्रशासन एवं अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

फीस विवाद बना तनाव का कारण
जानकारी के अनुसार, उज्जवल राणा पिछले कई दिनों से फीस संबंधी विवाद को लेकर कॉलेज प्रशासन पर अनदेखी और दबाव डालने के आरोप लगा रहा था। उसने इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायतें भेजी थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को उसने एसडीएम बुढ़ाना और सीओ को भी लिखित शिकायत दी थी। छात्र का आरोप था कि उसकी शिकायत को किसी स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गया।
आत्मदाह से पहले सोशल मीडिया पर लगाया था आरोप
घटना से एक दिन पहले उज्जवल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर प्राचार्य प्रदीप कुमार और कुछ शिक्षकों पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो में उज्जवल ने दावा किया था कि प्राचार्य ने पहले उसकी पिटाई की, और बाद में पुलिस बुलाकर दबाव बनाने की कोशिश की। उसने यह भी कहा कि जब वह अपनी शिकायत एसडीएम कार्यालय में देने जा रहा था, तब कॉलेज के एक शिक्षक ने वह पत्र छीनकर प्राचार्य को सौंप दिया।

छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन मौके पर
घटना के बाद कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। सैकड़ों छात्र कॉलेज गेट के बाहर धरने पर बैठ गए और निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया। वहीं, प्राचार्य प्रदीप कुमार ने छात्र द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि फीस प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार की जाती है और किसी छात्र के साथ दुर्व्यवहार नहीं हुआ।

जांच जारी, छात्र की हालत गंभीर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उज्जवल राणा की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। उसका बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
कॉलेज प्रशासन ने भी एक आंतरिक जांच समिति गठित करने की बात कही है। यह दर्दनाक घटना न केवल शैक्षणिक संस्थानों में संवाद की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि आखिर क्यों आज के युवा मानसिक रूप से इतने अकेले और असहाय महसूस कर रहे हैं।





