Indian Rupee लगातार कमजोर होता जा रहा है। बुधवार 3 दिसंबर को इतिहास में पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के पार चला गया। गुरुवार को भी गिरावट जारी रही और यह ₹90.4 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपये की इस भारी गिरावट का सीधा असर शेयर मार्केट के कई प्रमुख सेक्टर्स पर देखा जा रहा है—आईटी, फार्मा, ऑटो, ऑयल & गैस और केमिकल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित माने जा रहे हैं।
1. आईटी सेक्टर को सबसे बड़ा फायदा
रुपये में गिरावट का सबसे बड़ा लाभ आईटी कंपनियों को मिलता है क्योंकि इनकी कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से डॉलर में आता है।
- रुपये के कमजोर होने से मार्जिन बढ़ जाते हैं
- गुरुवार को Nifty IT Index 2% उछलकर 4 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया
- TCS, Wipro, Mphasis और Tech Mahindra के शेयरों में अच्छी तेजी
2. फार्मा सेक्टर पर असर सीमित
फार्मा कंपनियों की अमेरिकी बाजार में बड़ी पकड़ है, लेकिन रुपये की गिरावट का असर इन पर सीमित रहता है क्योंकि:
- ज्यादातर कंपनियां डॉलर एक्सपोजर हेज कर लेती हैं
- दाम डॉलर उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर तय होते हैं
हालाँकि, इनपुट लागत 40%-60% तक बढ़ जाती है जिससे मार्जिन पर दबाव बन सकता है।
3. ऑटो सेक्टर की एक्सपोर्ट कंपनीज़ को फायदा
रुपये में कमजोरी का फायदा एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड ऑटो कंपनियों को मिलता है, खासकर—
- TVS Motor: 30% वॉल्यूम और 25%-26% रेवेन्यू एक्सपोर्ट
- Bajaj Auto: 50% रेवेन्यू एक्सपोर्ट से
- Bharat Forge और Samvardhana Motherson: 60%-65% तक ग्लोबल OEMs से रेवेन्यू
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय करेंसी में हर ₹1 गिरावट से Bajaj Auto का EBITDA ₹200 करोड़ बढ़ता है।
4. ऑयल & गैस सेक्टर पर मिला-जुला असर
- ONGC और Oil India: रुपये में हर ₹1 गिरावट से EPS में 1-2% बढ़ोतरी, यानी फायदा
- Reliance Industries: इंपोर्ट-आधारित कमोडिटी (क्रूड, LNG, इथेन) महंगी होने से दबाव
लेकिन कंपनी का GRM डॉलर में होता है, जो इसे कुछ राहत देता है।
5. केमिकल सेक्टर को भी लाभ
अमेरिकी बाजार को एक्सपोर्ट करने वाली भारतीय केमिकल कंपनियों को रुपये की गिरावट से फायदा होता है।
इनमें शामिल हैं:
- नवीन फ्लोरीन
- SRF
- आरती इंडस्ट्रीज़
- अतुल लिमिटेड
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