औषधीय जंगल: तीर्थ नगरी ब्रजघाट में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की नर्सरी इस साल एक बड़ा परिवर्तन देखने जा रही है। हर साल लाखों पौधे तैयार करने वाली यह नर्सरी अब धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाले पौधों के साथ-साथ औषधीय पौधों की भी बड़े पैमाने पर नर्सरी तैयार कर रही है। इन पौधों को पूरे जिले में एक “औषधीय व धार्मिक जंगल” के रूप में विकसित किया जाएगा।

सरकारी अभियान के तहत हरियाली बढ़ाने की बड़ी पहल
उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कई वर्षों से राज्यभर में पौधारोपण अभियान चला रही है। उसी कड़ी में ब्रजघाट स्थित 3 हेक्टेयर नर्सरी में इस साल 4 से 5 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इनमें जामुन, शीशम, अमरूद, सागौन, पीपल, आम, पिलखन, बरगद, इमली, करहल, अर्जुन, काला बांस, कंजी, सहजन, अशोक आदि के ।
6–7 महीने में तैयार हो जाएंगे पौधे
नर्सरी में कुछ पौधों को पॉलीथीन बैग में लगाया गया है और कुछ को सीधे मिट्टी में।
जुलाई तक ये पौधे 3 से 4 फीट तक तैयार हो जाएंगे और मॉनसून के समय इन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में लगाया जाएगा।
इस वर्ष नर्सरी कुल 6,29,000 पौधे तैयार कर रही है।
पहली बार इतनी बड़ी संख्या में तैयार हुए देशी पौधे
धार्मिक-औषधीय पौधों का रिकॉर्ड उत्पादन:
| पौधे का नाम | संख्या |
|---|---|
| आंवला | 35,000 |
| बहेड़ा | 5,000 |
| बालमखीरा | 5,000 |
| सीता अशोक | 1,000 |
| रीठा | 1,000 |
| महुआ | 1,000 |
| हरड़ | 1,000 |
| कमरख | 1,000 |
| सिंदूर | 1,000 |
| चंदन | 1,000 |
| खिरनी | 1,000 |
| कुल | 52,000 |
वन विभाग का बयान
फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर करण सिंह के अनुसार— “इस साल हम धार्मिक और औषधीय दोनों प्रकार के पौधों पर विशेष फोकस कर रहे हैं। चंदन, सिंदूर और सीता अशोक हमारे प्रमुख पौधे हैं, जिन्हें पहली बार इतनी बड़ी संख्या में तैयार किया जा रहा है।”





