मुज़फ्फरनगर में रविवार को आयोजित आर्य समाज के वार्षिक सम्मेलन में पहुँची हिंदूवादी नेत्री साध्वी प्राची ने अपने बयानों से एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। मंच से बोलते हुए उन्होंने देशभर की बेटियों से कहा— “तुम काली बनो, कल्याणी बनो, लेकिन बुर्के वाली मत बनो, वरना तुम्हारे 36 टुकड़े होंगे और बोरे में पैक मिलोगी।”
धर्म से ऊपर इंसानियत रखो: साध्वी प्राची
साध्वी प्राची ने कहा कि देश में बढ़ती आपराधिक घटनाएँ समाज के गिरते संस्कारों का परिणाम हैं। मेरठ की एक घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “नीले ड्रम में 15 टुकड़ों में एक बच्चे की लाश मिली थी — यह पूरे समाज के लिए शर्मनाक और पीड़ादायक है।” उन्होंने कहा कि आज हिंदू परिवार सीमित बच्चों को जन्म देते हैं, लेकिन यदि उन्हें सही संस्कार न मिलें तो ऐसे जघन्य अपराध होते हैं। नेत्री ने माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार और मानवता के मूल्य भी सिखाएँ। उन्होंने कहा, “हम अपने बच्चों को आईएएस, डीएम या इंजीनियर बना रहे हैं, लेकिन अगर उनमें संस्कार नहीं हैं, तो वे सच्चे मनुष्य नहीं बन सकते। वेद कहता है — पहले मनुष्य बनो, धर्म से ऊपर इंसानियत रखो।”
वे हिंदू राष्ट्र की दिशा में कार्य कर रहे हैं
साध्वी प्राची ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा को समर्थन देते हुए कहा कि वे हिंदू राष्ट्र की दिशा में कार्य कर रहे हैं और सरकार को अब “हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र घोषित” करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि भारत अपनी पहचान पर गर्व करे।” बिहार चुनावों को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग की सराहना की, साथ ही कुछ नेताओं पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इन नेताओं को केवल कुर्सी चाहिए, देशहित नहीं।”
हमारा कानून अभी कमजोर है
बुर्का पहनकर मतदान करने वाली महिलाओं पर टिप्पणी करते हुए साध्वी प्राची ने सवाल उठाया, “जब आप पासपोर्ट या आधार कार्ड बनवाने जाती हैं, तब तो चेहरा दिखाती हैं, फिर वोट देने के समय क्यों नहीं? अगर चेहरा नहीं दिखा सकतीं, तो इसका मतलब कुछ तो छिपा है।” अंत में उन्होंने कहा कि देश में कड़े कानूनों की आवश्यकता है, ताकि धर्म के नाम पर षड्यंत्र रचने वालों पर सख़्त कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा, “हमारा कानून अभी कमजोर है। सरकार को इसे और मज़बूत करना चाहिए, ताकि अपराधियों को कड़ी सज़ा मिल सके।





