अहमदाबाद, 10 नवंबर 2025 (बेखबर न्यूज) – क्या न्याय व्यवस्था में कोई खोट आ गया है? गुजरात हाईकोर्ट ने रेप और यौन शोषण के दोषी आसाराम बापू को 6 महीने की जमानत दे दी है, जिसके बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में समर्थक सड़कों पर नाच-गाने लगे हैं, जयकारे लगा रहे हैं—ये नजारा देखकर पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठन सन्न रह गए हैं। ‘अंधविश्वास की हद पार हो गई!’—ये चीख हर तरफ गूंज रही है, क्योंकि आसाराम को 2018 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अब ये जमानत उनके समर्थकों को ‘चमत्कार’ लग रही है।
कोर्ट ने शुक्रवार को ये फैसला सुनाया, जिसमें आसाराम को स्वास्थ्य आधार पर जमानत दी गई। उनके वकील ने कहा, “बापू की उम्र 84 साल है, जेल में रहना उनके स्वास्थ्य के लिए घातक है।” लेकिन पीड़िता के वकील ने आपत्ति जताई: “ये फैसला न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। दोष सिद्ध हो चुका है, फिर जमानत क्यों?” गुजरात पुलिस ने तुरंत सुरक्षा के इंतजाम कड़े कर दिए, क्योंकि समर्थकों की भीड़ जेल के बाहर उमड़ पड़ी। एक वीडियो में समर्थक ‘बापू जिंदाबाद’ के नारे लगाते दिख रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ #JusticeForVictim ट्रेंड कर रहा है।
वायरल वीडियोज का शर्मनाक चेहरा: समर्थक जश्न मना रहे, पीड़ित परिवार सदमे में!
सोशल मीडिया पर ये वीडियोज धमाल मचा रहे हैं—अहमदाबाद की सड़कों पर सैकड़ों समर्थक ढोल-नगाड़ों के साथ नाच रहे हैं, मिठाई बांट रहे हैं। एक क्लिप में एक महिला कह रही है, “बापू निर्दोष हैं, ये भगवान का आशीर्वाद है!” लेकिन ये जश्न पीड़ित परिवार को झकझोर रहा है। पीड़िता की मां ने कहा, “हमारी बेटी की जिंदगी बर्बाद हो गई, और वो लोग जश्न मना रहे हैं? न्याय कहां है?” ये वीडियोज 9 नवंबर से वायरल हो गए, जिन्हें X, इंस्टाग्राम पर लाखों व्यूज मिल चुके हैं।
आसाराम केस की यादें ताजा हो गईं—2013 में 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ रेप का आरोप लगा, जो 2018 में साबित हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट का ये फैसला विवादास्पद है। सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने कहा, “ये अंधविश्वास को बढ़ावा देगा। सरकार को तुरंत अपील करनी चाहिए।” विपक्षी नेता भी मैदान में उतर आए—कांग्रेस ने कहा, “BJP सरकार के राज में अपराधी खुशहाल, पीड़ित बेबस!”
कोर्ट का फैसला: स्वास्थ्य या सियासत का खेल?
- जमानत शर्तें: आसाराम को अहमदाबाद से बाहर न जाने की हिदायत, हर हफ्ते रिपोर्टिंग, और कोई बयान न देने का आदेश।
- स्वास्थ्य आधार: डॉक्टरों की रिपोर्ट में किडनी और हृदय संबंधी समस्या बताई गई, लेकिन पीड़िता पक्ष ने इसे ‘ड्रामा’ कहा।
- पिछले केस: आसाराम को 2014 से जेल में हैं; समर्थक दावा करते हैं ‘राजनीतिक साजिश’।
- सुरक्षा: पुलिस ने 500+ फोर्स तैनात, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग बढ़ाई।
गुजरात सरकार ने कहा, “फैसला कानूनी है, हम निगरानी रखेंगे।” लेकिन ये घटना पूरे देश में बहस छेड़ रही है—अंधविश्वास vs न्याय। NGO रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे केसों में जमानत दर 40% बढ़ी है, जो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है।
पीड़ितों के लिए संदेश: हार न मानें, लड़ाई जारी!
- कानूनी मदद लें: NCRB हेल्पलाइन 1098 पर कॉल करें।
- सोशल मीडिया पर आवाज उठाएं: #EndSuperstition #JusticeDelayedIsJusticeDenied।
- जागरूकता: अपने आसपास के लोगों को ऐसे ‘बाबाओं’ से सावधान रहने की सलाह दें।
आसाराम का ये ‘कमबैक’ न्याय को चुनौती दे रहा है—क्या सुप्रीम कोर्ट उलटेगा फैसला? आपका क्या कहना है, जमानत जायज है या नहीं? कमेंट में बताएं! अपडेट्स के लिए बेखबर.इन पर बने रहें। #AsaramBapu #Andhvishwas #ViralVideo #JusticeForVictim #GujaratNews





