Wednesday, September 23, 2026

सावधान! मुजफ्फरनगर की हवा में घुल रहा जहर, खतरनाक स्तर पर पहुंचा AQI, लोगों की परेशानी बढ़ी

मुजफ्फरनगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सोमवार सुबह 350 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 200 से अधिक का AQI स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है, जबकि 200 से 300 के बीच का स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में गिना जाता है। पिछले 24 घंटों में जिले के वायु प्रदूषण स्तर में 21 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। सोमवार को जहाँ AQI 329 था, वहीं मंगलवार सुबह यह बढ़कर 350 हो गया। इस बढ़ते प्रदूषण स्तर ने जिला प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की भी चिंता बढ़ा दी है।

मुजफ्फरनगर पेपर मिलों से उठ रहा प्रदूषण का धुआं

प्रदूषण के इस गंभीर स्तर का प्रमुख कारण पेपर मिलों से निकलने वाले प्रतिबंधित प्लास्टिक कचरे और अन्य ठोस अपशिष्टों को जलाना बताया जा रहा है। औद्योगिक इकाइयों द्वारा पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी और कचरे के अनियंत्रित निपटान से भी वायु प्रदूषण में तेजी आई है। प्लास्टिक के जलने से निकलने वाली जहरीली गैसें और सूक्ष्म कण (PM 2.5) हवा को और अधिक विषाक्त बना रहे हैं।

स्वास्थ्य पर गंभीर असर

300 से अधिक AQI होने पर हवा में मौजूद प्रदूषक कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों और हृदय को नुकसान पहुँचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है। आंखों में जलन, सिरदर्द, खांसी और थकान जैसी शिकायतें भी आम होती जा रही हैं। स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से तत्काल और ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने पेपर मिलों की निगरानी बढ़ाने, प्रतिबंधित सामग्रियों के जलाने पर रोक लगाने और प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू करने पर जोर दिया है।

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