नई दिल्ली: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के ₹1100 करोड़ के RVI टेंडर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जब कई कंपनियां एक समान कीमत (Price Floor) पर बोली लगा रही थीं, तब सिर्फ MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) कंपनियों को बाहर करने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि टर्नओवर के नाम पर छोटे उद्योगों के साथ भेदभाव किया गया है, जबकि वे सभी शर्तें पूरी कर रही थीं।
MSME पर क्या पड़ेगा असर?
- 60-70 छोटी कंपनियां टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो सकती हैं
- 50-60 फैक्टरियां बंद होने के कगार पर पहुंच सकती हैं
- 4000 से 5000 लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा खतरा मंडरा रहा है
यह मामला MSME क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि सरकार की तरफ से MSME को बढ़ावा देने की बात कही जाती रही है।
क्या कहा गया?
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए अपील की गई है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी इस मामले में संज्ञान लें और छोटे उद्योगों को न्याय दिलाएं।
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IOCL का टेंडर
IOCL ने RVI (Refinery Vacuum Improver या संबंधित उत्पाद) से जुड़े ₹1100 करोड़ के टेंडर के लिए प्रक्रिया चलाई थी। इसमें बड़े टर्नओवर वाली कंपनियों को प्राथमिकता दिए जाने का मामला सामने आया, जिससे MSME सेक्टर नाराज है।
Bekhabar.in की अपील: केंद्र सरकार और IOCL से अनुरोध है कि इस टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा की जाए ताकि छोटे उद्यमियों के साथ कोई अन्याय न हो और रोजगार सुरक्षित रहे।





