गाजियाबाद: महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए यूपी सरकार की मिशन शक्ति योजना (Mission Shakti Yojana) के तहत जिलेभर में 25 सितंबर को हर थाने में एक छात्रा को एक दिन की थानाध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन ट्रोनिका सिटी थाने में इस योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां एक ऐसी छात्रा को एक दिन की थानाध्यक्ष बना दिया गया, जिसका नाम स्कूल की अधिकृत सूची में था ही नहीं। मामला सामने आते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और डीसीपी ने तुरंत जांच के आदेश जारी कर दिए।
स्कूल ने कहा – हमारे यहां की नहीं है यह छात्रा
सूत्रों के अनुसार जब स्कूल से छात्रा के नाम को लेकर पूछताछ हुई तो उन्होंने साफ कहा कि वह छात्रा उनके विद्यालय की नहीं है। इससे यह साफ हुआ कि चयन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की गई थी। जांच में सामने आया है कि संबंधित थानाध्यक्ष ने निजी पहचान के चलते छात्रा को यह जिम्मेदारी दे दी। इस पूरे मामले में मिशन शक्ति की पारदर्शिता और निष्पक्षता दोनों पर सवाल उठे हैं। वहीं डीसीपी ट्रांस हिंडन ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है।
महिला आयोग ने जताई नाराजगी
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य डॉ. हिमानी ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि – “यह गंभीर लापरवाही है। मिशन शक्ति जैसी पहल का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को बढ़ाना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं सरकार की मंशा को कमजोर करती हैं।” डॉ. हिमानी ने पुलिस विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





