इस्लामाबाद: पाकिस्तान के वरिष्ठ धार्मिक नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने हाल ही में पाकिस्तानी सेना और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की तीखी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश पहले ही आर्थिक संकट, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, इसलिए वह किसी भी सूरत में एक और युद्ध का जोखिम नहीं उठा सकता। रहमान का यह बयान हाल ही में अफगानिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है।
पश्तून समुदाय में बढ़ता असंतोष
पाकिस्तानी सेना की कठोर और आक्रामक नीतियों को लेकर पश्तून समुदाय में नाराजगी बढ़ती जा रही है। खुद रहमान भी इसी समुदाय से आते हैं और उनका मूल स्थान खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का डेरा इस्माइल खान है। उन्होंने जनरल मुनीर को चेतावनी देते हुए कहा कि सेना को सीमाओं पर युद्ध छेड़ने के बजाय देश की आंतरिक समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान में अब एक और युद्ध झेलने की क्षमता नहीं बची है।
भारत से हुए युद्धों का दिया उदाहरण
रहमान ने अपने वक्तव्य में भारत के साथ हुए पिछले युद्धों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संघर्षों ने पाकिस्तान को भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान पहुंचाया था। इन युद्धों की वजह से न सिर्फ पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी गहरा आघात लगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को इन गलतियों से सबक लेना चाहिए और भविष्य में युद्ध की सोच से दूर रहना चाहिए।
सेना की नीतियों पर उठाए सवाल
जो मौलाना रहमान कभी पाकिस्तानी सेना के समर्थक माने जाते थे, अब उन्होंने अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने सेना की उन दमनकारी नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं, जो खासतौर पर पश्तून और बलूच समुदायों को प्रभावित करती हैं।





